तहसीलदार शेखर पटेल की कार्यशैली से खफा राजस्व अमला: देर रात तक काम का दबाव और मानसिक प्रताड़ना का आरोप, हटाने की मांग को लेकर खोला मोर्चा...

 


लोरमी / मुंगेली -  मुंगेली जिले के अंतर्गत आने वाली लोरमी तहसील में प्रशासनिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। तहसील के समस्त राजस्व निरीक्षक (RI) संघ और राजस्व पटवारी संघ ने तहसीलदार शेखर पटेल की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तहसीलदार को तत्काल नहीं हटाया गया, तो कल यानी 29 जनवरी 2026 से पूरा राजस्व अमला अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया है। बैठक में फूटा गुस्सा, गिनाईं प्रताड़ना की कहानियां 28 जनवरी को आयोजित एक संयुक्त बैठक में राजस्व कर्मियों ने तहसीलदार पटेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का कहना है कि तहसीलदार की कार्यशैली "दमनकारी" है। उनके डेढ़-दो साल के कार्यकाल में इतने 'कारण बताओ नोटिस' (SCN) जारी किए गए हैं, जितने पूरे सेवाकाल में नहीं देखे गए। इससे कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है और वे मानसिक तनाव में हैं।

गंभीर आरोप जो ज्ञापन में शामिल हैं :-

* कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें रात 11-12 बजे तक फोन किया जाता है और सुबह 8 बजे दफ्तर बुला लिया जाता है। 24-24 घंटे एक ही काम में झोंक दिया जाता है, जिससे पारिवारिक कलह की स्थिति निर्मित हो रही है।

* महिला कर्मियों का अपमान:- महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें देर रात तक कार्यालय में बिठाया जाता है और उनकी निजी समस्याओं का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाकर उन्हें बेइज्जत किया जाता है।

* संसाधनों का अभाव और शोषण:- पटवारी आकाश चतुर्वेदानी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि बिना किसी शासकीय संसाधन के उन्हें निजी वाहन से नक्शा लेने रायपुर भेजा गया, और रुकने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया।

* संवादहीनता:- व्हाट्सएप ग्रुप में समस्याओं को रखने पर मैसेज डिलीट कर दिए जाते हैं और फील्ड के कर्मचारियों का फोन तक नहीं उठाया जाता, जिससे आपात स्थिति में कार्य करना दूभर हो गया है।

कल से काम बंद, हड़ताल शुरू राजस्व निरीक्षक और पटवारी संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पूर्व में दिए गए ज्ञापनों और चपरासी द्वारा पटवारी से दुर्व्यवहार के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अतः अब उनके पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। आज से ही शासकीय कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया गया है सभी राजस्व कर्मचारी कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे। इसके पूर्व में जब मुंगेली तहसील में थे तो ग्राम रामाकापा (हेड़सपुर) के कोटवार रतन दास ने 7 फरवरी 2024 को खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा  दिया था। उन्होंने अपने आवेदन में यह निवेदन भी किया कि उनके स्थान पर उनके पुत्र किशन दास को कोटवार नियुक्त किया जाए। फिर तहसीलदार महोदय ने उसी 7 फरवरी 2024 को ही उनके बेटे की नियुक्ति कर दी गई  जिस पर युवा कांग्रेस के द्वारा तहसीलदार के ऊपर नियमों की दुरुपयोग करते हुए कार्यों का करने का आरोप लगाया गया था तहसीलदार ने भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 एवं 231 के तहत बने कोटवार नियमों (नियम 3, 4 और 8) की अनदेखी की जल्दबाजी में निर्णय तहसीलदार ने एक ही दिन में इस्तीफा स्वीकार किया और उसी दिन पुत्र की नियुक्ति भी कर दी। नियमत कोटवार की नियुक्ति के लिए ग्राम सभा का प्रस्ताव और समाचार पत्रों में विज्ञापन (इश्तहार) प्रकाशन अनिवार्य है, जिसे नजरअंदाज किया गया। वंशानुगत नियुक्ति नहीं: नियमों के अनुसार, पिता के इस्तीफे के बाद पुत्र को सीधे पद देने का कोई प्रावधान नहीं है, इसके लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया होनी थी लेकिन ऐसा नहीं करना संदेह की नजर में आते हैं क्या ऐसी आन पड़ी जो एक ही दिन पर सारा कुछ कार्य करना पड़ा यह प्रशासनिक अम्लों के लिए बहुत ही प्रश्न वाचक चिन्ह रह चुका है, उसके बाद भी पद पावर का दुरुपयोग करते हुए तहसीलदार द्वारा कोटवार की नियुक्ति तथा उनके नाम पर शासकीय जमीन का भी नामांतरण कर दिया गया। तथा मुंगेली जनदर्शन में कुछ पैसे के संदर्भ में भी तहसीलदार के ऊपर आरोप लगाया जा चुका है साथ ही साथ एक पत्रकार के ऊपर भी इनके द्वारा अपने पद पावर का दुरुपयोग करते हुए जेल भेजा जा चुका है इसी प्रकार मुंगेली में भी इनका कार्य शैली सही नहीं देखने को मिल पाया था इसमें जिला प्रशासन किस प्रकार की अपनी भूमिका निभाती है यह तो अब आने वाले समय ही बता पाएंगे।

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